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नवजात शिशु की देखभाल करने के लिए जाने सबसे ज़रूरी बातें

माँ बनना किसी भी महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी का अनुभव होता है. मगर माँ बनने के बाद बच्चे की सम्भाल करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल का काम होता है. एक नवजात शिशु को बहुत ही देखभाल की ज़रूरत होती है. आप अपनी नज़र को एक मिनट के लिए भी इधर से उधर नहीं कर सकते. छोटे बच्चों को देखभाल के साथ ही स्नेह की भी बहुत आवश्यकता होती है. 9 महीने तक अपनी कोख में बच्चे को रखने के बाद जब कोई महिला उसे जन्म देती है तो उसके लिए ज़िन्दगी में उससे बढ़कर कोई लम्हा नहीं होता और महिला तो अपने बच्चे की देखभाल की चिंता भी होने लगती है. जब किसी के घर पहली बार कोई बच्चा होता है तो उनको यही डर लगा रहता है की उस बच्चे को गोद में कैसे उठाएँ, उसे कैसे नहलाएँ, उसको कैसे दूध पिलाएँ, रोते को चुप कैसे कराएँ और साथ ही उसको कैसे सुलाएँ. अगर आपके घर में भी अभी अभी किसी नन्हे मेहमान ने जन्म लिया है तो आपको भी ये बातें ज़रूर पता होनी चाहिए की बच्चे की सही से देखभाल कैसे करें. आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे है वो steps जिससे आप अपने बच्चे की care सही से कर पाएँगे.

Chote Bache Ki Dekhbhal

नवजात शिशु को पकड़ने से पहले ज़रूरी चीज़ें

अगर आपके घर में अभी अभी किसी नवजात शिशु ने जन्म लिया है तो आपके लिए सबसे ज़रूरी है की की आपको पता हो की आपको उसकी देखभाल कैसे करनी है. क्योंकि अगर आप थोड़ी से ढील बरतेंगी तो आपको उसके गंभीर परिणाम उठाने पड़ सकते हैं.

  1. अगर आप किसी भी तरह का कोई काम करके आई हैं तो नवजात शिशु को छूने से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छे से धो लें. जिससे बच्चे को infection होने का डर कम हो जाता है.
  2. बच्चे की गर्दन को आराम से और संभलकर पकड़ना चाहिए क्योंकि नवजात बच्चे की गर्दन काफ़ी नाजुक होती है और वो पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होती. इसलिए आप अपने बच्चे को गोद में उठाते हुए या फिर रखते हुए उसकी गर्दन को अपने हाथ से सहारा ज़रूर दें.
  3. बच्चे को कभी भी अपनी गोद में लेकर ज़ोर से न हिलाएँ, न घुमाएँ और न ही ऊपर उछालकर उसे हँसाने की कोशिश करें क्योंकि ये सारे कार्य उसके लिए खतरनाक हो सकते हैं. जिससे उसके ४. खून जमने या फिर दिमाग पर भी असर पड़ सकता है. क्योंकि ये आपके लिए सिर्फ एक खेल हो सकता है मगर नवजात शिशु के अंग अभी बहुत नाजुक होते और वो ये झटके सह नहीं पाते.
  4. बच्चे को सोते समय ज़ोर से पंखा नहीं चलाना चाहिए, इससे बच्चे को साँस लेने में दिक्कत आ सकती है.

नव जात शिशु का पालन पोषण कैसे करें

  1. अपने बच्चे को प्यार और दुलार से रखना ही हर माँ का प्रथम कार्य बन जाता है. माँ को अपने नवजात शिशु को अपने सिने से लगाकर रखना चाहिए. उसकी हर ज़रूरत का आपको खुद पता होना चाहिए. वो अपनी ज़रूरत के बारे में खुद नहीं बता सकता.
  2. बच्चे को रोज़ाना oil से massage करना चाहिए और मालिश हमेश प्यार से करनी चाहिए, ज्यादा ज़ोर से नहीं.
  3. आप छोटे बच्चे को लोरी सुनाकर उसको सुला या फिर उसका दिल बहला सकते हैं आप उसका दिल बहलाने के लिए उसके झूले में कुछ रिंग बेल या फिर छोटी-छोटी घंटियाँ में लगा सकते हैं. ताकि झूले के हिलते ही वो घंटियाँ हलकी आवाज़ में बजती रहे और बच्चे का मनोरंजन होता रहे.
  4. कुछ ऐसे बच्चे होते है जिन्हें ज्यादा शोर पसंद नहीं होता और वो सही से सो नहीं पाते. जिसकी वजह से वो बाद में चिडचिडे बन जाते हैं.
  5. शिशु के जन्म के बाद कुछ दिनों के लिए उसे कपड़े में लपेटकर ही रखना चाहिए. आप इसके बारे में अपनी nurse या फिर घर में कोई बड़ा सदस्य हो वो बता देगा.

डायपर बदलने के टिप्स

  1. आप बच्चे के लिए कपडे या disposable diapers का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस चीज़ का ध्यान रखें की समय समय पर check करते रहें की कहीं बच्चे ने पेशाब या पोट्टी तो नहीं कर दी है. अगर कर दी है तो तुरंत diaper को change कीजिए.
  2. आपको diaper change करने से पहले शिशु को पीछे से अच्छे से साफ़ कर लेना चाहिए. इसके लिए आपको normal पानी का इस्तेमाल कीजिए. अगर सर्दियों का समय है तो इस बात का अवश्य ध्यान रखें की पानी को हल्का सा गुनगुना कर लें.
  3. इसके लिए आप रुई को गुनगुने पानी से गिला करके बच्चे की सफाई करें और पोंछने के बाद आप किसी साफ़ और सूखे कपड़े से उसके उस हिस्से को साफ़ कर दें.
  4. अब आप बच्चे की स्किन पर diaper ointment को लगाकर नया diaper पहना दें. Diaper ointment बहुत ज़रूरी होता है जो बच्चे की स्किन पर rashes होने से बचाता है.
  5. अगर आप diaper ointment लगा रहे हैं फिर भी आपके बच्चे की rashes हम नहीं हो रहे हों तो आपको नज़दीकी doctor से जांच जरुर करवानी चाहिए.

नवजात शिशु के सोते समय रखें ध्यान

  1. एक नवजात शिशु एक दिन में कम से कम 15 घंटे तक सोता है. वो लगातार तो 15 घंटे नहीं सोते बल्कि वो 3-4 घंटे में जागते और सोते रहते हैं.
  2. बच्चों को दिन और रात का कुछ नहीं पता होता. इसलिए अधिकतर बच्चे दिन में सोते और रात को जागते रहते हैं.
  3. बच्चे के सिर के निचे कोई ऊँची चीज़ या सामान न रखें नहीं तो उसे problem हो सकती है.
  4. शिशु के सोने की position थोड़े समय के बाद change करते रहें. दाएँ से बाएँ जो बहुत ही अच्छा है.
  5. बच्चे के सोने वाला कमरे में स्वच्छ हवा आती रहे. किसी बंद कमरे में बच्चे को न सुलाएँ.

बीमारियों से बचाने के लिए समय पर शिशु को टीके अवश्य लगवाते रहें

  1. जन्म के तुरंत बाद शिशु को पोलियो की दवा, बीसीजी और हिपेटाइटिस का टीका जरुर लगाएं.
  2. बच्चे को पुरे कपडे पहनकर रखना चाहिए और साथ ही माँ के नजदीक रखना चाहिए ताकि उसे मैं के शरीर से गर्मी मिलती रहे.
  3. वैसे तो hospital में माँ को बच्चे की देखभाल के सभी आवश्यक जानकारी दी जाती है. मगर यदि आपको जानकारी नहीं मिली है तो माँ को doctors से इसके बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए.
  4. अगर आपका बच्चा जन्म के समय अस्वस्थ पैदा हुआ है तो आप उसे चिकित्सक की निगरानी में रखें. और यदि बच्चा घर पर है तो आप कमरे के temperature का पूरा ध्यान रखें न ज्यादा कम हो और न ज्यादा अधिक हो. क्योंकि hospital में तो नर्स और doctors आपको guide करने के लिए होते हैं पर घर में आप कुछ गलतियाँ कर बैठती हैं.

माँ का दूध है सबसे फायदेमंद

  1. नवजात शिशु के लिए सबसे फायदेमंद माँ का दूध होता है क्योंकि माँ के दूध में किसी तरह की कोई मिलावट नहीं होती और उसमे बहुत से पोष्टिक तत्व भी मोजूद होते हैं.
  2. Breast Feeding करने से बच्चे को अंदरूनी ताकत मिलती हैं और साथ ही वो बहुत सी बिमारियों से लड़ने की ताकत भी मिलती हैं इसके सही मात्रा को पीने से बच्चा मजबूत और सेहतमंद होता है और माँ के दूध से बच्चे के शरीर की प्रितिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.
  3. Delivery होने के 6 महीने तक माँ को अपने खान पान का बहुत विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इन दिनों में माँ का खाना बच्चे के स्वास्थ को बहुत प्रभावित करता है. जो बच्चा रोज़ाना माँ के दूध का सेवन करता है उसे normal बीमारियाँ जैसे जुकाम, बुखार से तो छुटकारा मिलता ही है पर साथ ही बड़ी बीमारियाँ जैसे अस्थमा वगेरा होने का कोई खतरा नहीं रहता.
  4. 6 महीने के बाद आप बच्चे को बाहरी खाना वो भी हल्का क्योंकि ज्यादा ठोस खाना बच्चे के पेट को ख़राब कर सकता है जो उसके लिए पचाना मुश्किल हो जाता है. तो आप उसे सेरेलेक दे सकती हैं जिसे अच्छी तरह से मेश करके ही बच्चे को देना चाहिए. थोडे अंतराल पर देना चाहिए, इससे बच्‍चे को शरीर के विकास के लिए पर्याप्‍त पोषक तत्‍व मिलेगें। मां के दूध के साथ बच्चे को सेरेलेक दे सकते हैं.

स्वछता पर पूरा ध्यान दें

बच्चे की त्वचा और शरीर बहुत ही नाज़ुक होते हैं इसलिए आपको इस पर बहुत ही अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है. बच्चों की त्वचा बहुत ही संवेदनशील होती है तो आपको अपने आस पास सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए. माँ और बच्चे का रोज़ाना नहाना बहुत ज़रूरी है. बच्चे को नहलाते समय कमर के नीचे, पिछले हिस्से, मुंह, गर्दन आदि पर अच्छे से सफाई करें. शिशु की आँखों को भी साफ़ करें. नवजात शिशु को नहलाने के लिए साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं या फिर कौन से साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए, ये आप अपने doctors से अवश्य पूछ लें.

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