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मुस्लिन धर्म और धर्म-गुरुओं की व्याख्या

दोस्तों आज का हमारा विषय आध्यात्म से जुड़ा हुआ है. हम अपने इस आर्टिकल के जरिए आप लोगों तक मुस्लिम धर्म के गुरुओं की थोड़ी व्याख्या करेंगे. मुस्लिम धर्म में बहुत से धर्म-गुरु हुए हैं जिन्होंने अपना सब कुछ गवाकर उस खुदा (अल्लाह, रब, ईश्वर, भगवान) की सच्चे मन से इबादत की थी.

सभी गुरुओं ने लोगों को सच्चे मार्ग पर चलने की सलाह दी है फिर चाहे वो मुस्लिम धर्म-गुरु, इसाई धर्म-गुरु, सिख धर्म-गुरु, बुद्ध धर्म-गुरु हों या जैन धर्म-गुरु हों.

अगर किसी ने अपनी इबादत (तपस्या) से एक मुकाम हासिल किया है तो हमें उन सबकी इज्जत करनी चाहिए. क्योंकि अल्लाह तक पहुँचना बहुत ही कठिन रास्ता है और अगर किसी ने अपना तन मन मारकर, सभी तरह की सुख सुविधा को छोड़कर उस परमात्मा का नाम जपा है तो उस पर परमात्मा की कृपा रहती है वो रब का ही दूसरा रूप होते हैं. खुदा का हाथ हमेशा उनके सिर पर रहता है. ऐसे इंसान को जिसने उस सच्चे रब की भक्ति की हो उसे न तो कभी आज़माना चाहिए और न ही उसका उपहास उड़ाना चाहिए. किसी भी धर्म या धर्म-गुरु की कभी बेज्जती नहीं करनी चाहिए और न ही उन्हें अपने धर्म से छोटा समझना चाहिए.

मुस्लिन धर्म और धर्म-गुरु

मुस्लिम धर्म के गुरुओं ने बहुत से बलिदान दिए हैं जो भारत के लोगों को पता नहीं है क्योंकि ये हिंदू और पंजाबी धर्म के महापुरुषों कि तरह स्कूल की किताबों में नहीं हैं सिवाय बाबा फरीद को छोड़ के. बाबा फ़रीद के बहुत से दोहे आपको स्कूल की बुक्स में पढ़ने को मिल जाएँगे.

नीचे हम आपको मुस्लिम धर्म के धर्म गुरुओं के बारे में कुछ ज़रूरी बातें बनाने जा रहे हैं इन्हें पढ़ें और अपना ज्ञान बढ़ाएँ. तो आइए जानते हैं ऐसे ही महान गुरुओं के बारे में.

मुस्लिम धर्म का इतिहास

मुस्लिम धर्म में कई प्रकार के गुरु हुए हैं जिनका रुतबा उनकी इबादत के हिसाब से हुआ है. हम नीचे आपको सभी तरह के मुस्लिम गुरुओं के प्रकार और उनके बार में थोड़ी सी व्याख्या करेंगे.

5. पीर

पीरों के बारे में तो आपने सुना ही होगा. शायद आपके आस पास कोई दरगाह भी होगी. पीरों की इबादत का सिलसिला भी बहुत जबरदस्त था. वो जहाँ पर एक बार इबादत करने बैठ गए तो बस बैठ गए. फिर दिन से रात कब हुई और 1 दिन से 1 महीना कैसे बीत गया ये पता ही नहीं चलता था.

वीरवार वाले दिन बहुत से लोग दरगाह में माथा टेकने जाते हैं और अपने मन की इच्छाएँ भी माँगते हैं. वीरवार वाले दिन सभी दरगाहों में ‘कवाली संगीत’ का कार्यक्रम रखा जाता है. अगर किसी के भी मन किसी भी तरह की कोई इच्छा हो और वो सच्चे में से पीरों की दरगाह में जाए तो उसकी इच्छा ज़रूर पूरी होती है.

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4. अम्बिये

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3. औलिये

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2. वली

वली वो गुरु हुए हैं जिन्होंने बहुत कठोर तपस्या की होती है. उनकी इबादत से खुश होकर खुदा ने उन्हें ये स्थान दिया होता है. वालियों का रुतबा बहुत बड़ा होता है जो की अपनी इबादत के दम पर कुछ भी कर सकते हैं. ये चाहें तो किसी बड़े से बड़े मुजरिम को अपनी एक कर्म वाली नज़र से देखने भर से ही दोजकी से जन्नती बना दें.

वलियों में चार सिलसिले होते हैं जो निम्न प्रकार है:

1. कादरी
2. चिश्ती
3. नक्शबंदी
4. शोरवर्दी

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1.  नबी (पैगम्बर) 

दोस्तों पैगम्बर इस दुनिया में सबसे पहले उतारे जाने वाले गुरु थे जिन्होंने भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाया था. उन दिनों में लोग जादू टोने पर विश्वाश करते थे और राक्षस की मूर्तियों की पूजा करते थे और उसी को खुदा मानते थे.
उनकी गलती भी नहीं थी क्योंकि उनसे पहले किसी को रब के होने का वजूद ही मालूम नहीं था. खुदा ने अपने प्यारे नबियों को इस धरती पर भेजा की लोग भटके हुए हैं और तुम लोगों को सही रास्ता दिखाओ.

Mohammad Birth, Mohamad Child Photo

नबियों ने लोगों को बुतपरस्ती से रोककर उस ‘सोहने रब’ की इबादत करने के लिए कहा था जो मूर्तियों में नहीं है क्योंकि खुदा का कोई आकर नहीं होता. उस खुदा ने इलावा किसी को अपनी पूजा करवाने का अधिकार नहीं है.

Mohammad prophet

दोस्तों आपको हमारा आज का आर्टिकल कैसा लगा? हमें पूरी उम्मीद है की आपको हमारा आज का आर्टिकल बहुत अच्छा लगा होगा और आपको मुस्लिम धर्म के गुरुओं के बारे में काफ़ी ज्ञान मिला होगा. अगर आप हमसे इस आर्टिकल से रिलेटेड किसी भी तरह का कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो आप बेझिझक हमसे पूछ सकते हैं. आपके प्रश्नों का उत्तर देना हमारे लिए बहुत ख़ुशी की बात होगी.

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