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ध्यान करने की शैलियाँ – Different Types of Meditation

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दोस्तों हमारे पिछले article में हमने आपको meditation कैसे करते हैं उसके बारे में बताया था. आज हम आपको बताएँगे की ध्यान (meditation) करने की कितनी शैलियाँ हैं जिसको आप ध्यान करने के लिए इस्तेमाल में ला सकते हैं. दोस्तों हमारे समाज में बहुत से बड़े-बड़े साधु-संतों ने जन्म लिया है और उन्होंने हमें ध्यान करने के बहुत से तरीके बताए हैं. ध्यान करने का मकसद हमारी शारीरिक और मानसिक तंत्रिका को जोड़ना है ताकि हम ध्यानपूर्ण हो सकें. ऐसी बहुत सी क्रियाएँ हैं जो हमें ध्यान का सही result देती हैं. हम उनमें से कुछ क्रियाएँ लेकर आएँ हैं जिसका नियमित अभ्यास करने से आप उस परम ज्योति (परमात्मा) का साक्षात्कार जल्द से जल्द कर सकते हैं और साथ ही आपको कई तरह की बिमारियों से भी छुटकारा मिलता है.

ध्यान करने के विभिन्न तरीके

1. श्वसन (Breathing) का अनुसरण कीजिए

Metitaion Ki Vidhi

अगर आप ध्यान करने की शुरुआत ही कर रहे हैं तो आपके लिए सबसे बेहतर है श्वसन-ध्यान. इस क्रिया को करना सबसे आसन है जिसमें आपको अपनी दोनों आँखों को बंद करके अपने मन को नाभि के ऊपर के किसी भी एक स्थान पर टिका लें. अब सामान्यतौर पर अपनी साँस को लेते और छोड़ते रहें. अपने ध्यान को पेट के ऊपर उठने और निचे गिरने पर केन्द्रित करें. इस बात पर बिलकुल भी ध्यान देने की कोशिश न करें की ये सांस पिछली सांस से छोटी थी या लम्बी थी. आप अपने मन में कुछ मनोचित्र भी सोच सकते हैं जो आपका ध्यान केन्द्रित करने में आपकी मदद करते हैं.

  • अपने मन में ऐसी कल्पना कीजिए की आपकी नाभि पर एक सिक्का रखा है जो आपकी साँस लेने और छोड़ने के साथ उठता गिरता रहता है.
  • आप समुंदर में लहरों पर तैरते एक चिन्ह की कल्पना करें जो साँसों के साथ उठ और गिर रहा हो.
  • आप अपने पेट पर रखे किसी कमल के फूल की कल्पना भी कर सकते हैं जिसकी पंखुड़ियाँ आपकी सांस के साथ फहरा रह हो.

अगर आपका मन भटकने लगे तो उसे रोकने की कोशिश कीजिए. अगर आपको ध्यान भटक रहा है तो आप घबराइए मत, ध्यान भटकना एक आम बात है. शुरुआती दिनों में ये सबके साथ होता है मगर धीरे-धीरे आप ज्यादा से ज्यादा अभ्यास करके इस पर control कर सकते हैं.

2. एक मंत्र का जाप करें

Meditation Ke Tarike

मंत्र-ध्यान, ध्यान का एक दूसरा रूप है या आप कह सकते हैं की ध्यान की एक दूसरी शैली है. इसमें आपको किसी मंत्र (एक ध्वनि या वाक्य) को अपने मन में दोहराना होता है. इस मंत्र को आपको तब तक दोहराना है जब तक की आप ध्यान की में अच्छी तरह न खो जाएँ. याद रखें की आपको उसी मंत्र का चुनाव करना है जो याद रखें में आसन और छोटा हो. जैसे आप ॐ मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं. आपको मंत्र को उच्चारण अपने मन में ही करना है. मंत्र शब्द का संस्कृत भाषा में अर्थ ‘मन का उपकरण’ है.

मंत्र का जाप करना हमारे मन में कंपन पैदा करके हमारी सोच को चेतना के गहन प्रदेश में ले जाता है. जिस भी मंत्र का आप चुनाव करें उसे बार-बार दोहराते जाएँ और अगर आपका मन भटकने लगे तो आप परेशान न होएँ बल्कि अपने ध्यान को दुबारा से एकाग्र करने की कोशिश करें. जब आप अनुभव और चेतना के गहरे धरातल में पहुँच जाएँ तो आपके लिए मंत्र दोहराना आवश्यक नहीं रह जाता.

 

3. अन्तःदर्शन ध्यान की कोशिश करें

Meditation Style

ध्यान के एक और कला का नाम है ‘अन्तःदर्शन ध्यान’ जिसमे अपने मन के अन्दर एक शांतिपूर्ण माहोल को तैयार किया जाता है. आपको अपने मन में किसी ऐसे स्थान की कल्पना करनी है जो वास्तविकता में नहीं हो. ये स्थान बिलकुल नया और अनोखा होना चाहिए. आप कोई भी स्थान की कल्पना कर सकते हैं जैसे ठंडा स्थान, गर्म स्थान, फूलों से भरा कोई घास वाला मैदान, कोई एकांत वन. आप जिस भी स्थान में प्रवेश करना चाहते हैं उसे पूरी तरह से महसूस करने की कोशिश करें.

अपने आसपास की चीजों की कल्पना करने की कौशिश न करें और अगर विचार आए तो उसके पीछे न जाएँ. जिस भी स्थान पर आप हैं उस स्थान की आवाजों और वहां की ख़ुशबू को महसूस कीजिए. उस स्थान की हवा आपके शरीर के साथ स्पर्श कर रही है ये भी महसूस करें. इस परिवेश का आनंद लें और इसमें पूरी तरह से डूब जाएँ. जब आप ध्यान में से उठाना चाहें तो आप कुछ गहरी साँसों को लें और फिर आँखों को खोल लें. अगली बार आप जब भी ध्यान के लिए बैठें तो आप उसी जगह के बारे में दुबारा से सोचें या फिर किसी नई जगह के बारे में भी कल्पना कर सकते हैं.

4. ह्रदय-चक्र ध्यान करना

Meditation Ke Parkar

ह्रदय-चक्र ध्यान भी ध्यान की और प्रणाली है जिसे ध्यान करने के लिए बहुत से लोग इस्तेमाल में लाते हैं. ह्रदय-चक्र हमारे शरीर में मौज़ूद सात चक्रों या उर्जा केन्द्रों में से एक है जो छाती के बीचों-बीच स्तिथ है. इसको करने के लिए अपनी दोनों आँखों को बंद करें और अपने दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़कर गर्मी पैदा करें और फिर अपने left hand को अपनी छाती के बीच में रखें और अपने right hand को अपने left hand के ऊपर रख लें. एक गहरी सांस को लें और छोड़ें, जब आप सांस को छोड़ रहे हों तो आपको ‘याम’ शब्द का उच्चारण करना है जो ह्रदय-चक्र के कम्पन से जुड़ा हुआ शब्द है.

जब प्रक्रिया को करते समय आप अपने सीने और हथेलियों से विकिरण की शक्ल में, किसी चमकती हुई हरे रंग की उर्जा की कल्पना करें. हरे रंग की यह उर्जा प्रेम, जीवन और सभी सकारात्मक भावनाएँ जो आप उस समय महसूस कर रहे हों. जब आप पूरी तरह से तैयार हो गए हो तो आप अपने हाथों को अपनी छाती से हटाकर अपने आत्मीय-परिजनों पर हथेलियों से उर्जा प्रसारित होने दें. आप अपने शरीर को अंदर से अनुभव करें. क्या आप अपने शरीर में उर्जा के एक स्तोत्र को महसूस कर रहे हैं. ये आपको आपकी बाँहों या पैरों में ज्यादा महसूस हो रहा होगा. अगर आपको उर्जा का एक field नहीं भी महसूस हो रहा तो कोई बात नहीं है. ये उर्जा का क्षेत्र आपको अपनी अपने अस्तित्व से जोड़ने में भी मदद करता है.

5. किसी वस्तु पर ध्यान केन्द्रित कीजिए

Meditation Types

ध्यान करने की तीसरी कला खुली आँखों से ध्यान करना है जिसमें आप अपने मन को भटकने से रोकने के लिए किसी नज़र आने वाला वस्तु का प्रयोग करें जो आपको गहरी चेतना के स्तर तक पहुँचाने में आपकी मदद करेगा. यह विधि कुछ लोगों के लिए बहुत ही आसन रहती है क्योंकि इसमें अपनी आँखों को टिकने के लिए एक बिंदु सामने रहता है जो मन को भटकने नहीं देता. ये दृश्यमान वस्तु कोई भी हो सकती है जैसे crystal, फूल या फिर किसी तरह की दिव्य मूर्ति वैसे कई लोग जलती हुई मोमबती की लौ को देखकर भी इस ध्यान को करते है जो उन लोगों को ज्यादा आसन लगता है.

उस वस्तु को अपनी आँखों के बिलकुल सामने level पर रखें जो न ज्यादा ऊपर हो न ज्यादा नीचे ताकि आपको उसको लगातार देखने पर किसी तरह की तकलीफ़ या फिर गर्दन पर ज्यादा ज़ोर न पड़े. दो ध्यान से टकटकी लगाकर देखते रहिए जब तक की आपके सामने की चीज़ आपको धुंधली न दिखने लग जाए और आप पूरी तरह से उसमे न खो जाएँ. जब आप पूरी तरह से उस वस्तु पर अपने ध्यान को केन्द्रित कर लेंगे तो आपको परम शांति का आभास होगा और आप अपने आपको काफ़ी हल्का महसूस करेंगे.

6. आत्म-काया ध्यान कीजिए

Meditation method

ध्यान की एक और तकनीक है जिसका नाम है ‘आत्म काया निरीक्षण’ जिसमें आप आप एक-एक करके शरीर के प्रत्येक अंग पर ध्यान केन्द्रित करते हो और फिर उस अंग को पूर्ण रूप से ढीला छोड़ देते हैं. ध्यान की इस क्रिया में आप शरीर को आराम देते हुए अपने मन तक पहुँचते हैं और फिर मन के आराम करने के अवस्था में पहुँच जाते हैं. इसमें आप अपनी आँखों को बंद करके अपने शरीर का कोई आरंभ बिंदु चुन लीजिए. ये आप अपने पैर के अंगूठे से शुरू कर सकते हैं. अगर आपके शरीर में किसी भी मांसपेशी में ढीलापन या फिर दर्द है तो आप उस पर अपना पूरा ध्यान लगाएँ जो आपकी पीड़ा को दूर करने में आपकी मदद करेगा.

पैरों की उँगलियों के पूरी तरह से अवस्था में आ जाने पर आप इस तकनीक को आप आगे की और बढाएं और अपने शरीर के बाकी हिस्सों पाँव से होकर पिंडली, घुटने, जांघों, कूल्हों, कमर, पेट, छाती, पीठ, कंधे, हाथ, उंगलियों, गर्दन, चेहरा, कान और अपने सिर के ऊपरी भाग तक जाइए. इसमें काफ़ी समय लग सकता है पर आपको देना होगा. जब आपका पूरा शरीर विश्राम की अवस्था में पहुँच जाए तो आप ध्यान को केन्द्रित करें और ध्यान की सुखद अनुभूति को महसूस कर सकते हैं.

7. सचल ध्यान को करना है फायदेमंद

Kind of Meditation

ध्यान करने का एक और तरीका है वो है चलते हुए ध्यान करना इसमें पैरों की गति का अनुसरण करते हुए शरीर और पृथ्वी के संयोग के प्रति सचेत रहना पड़ता है. अगर आपके पास पूरा समय है और आप काफ़ी देर तक ध्यान करने के बारे में सोच रहे हैं तो आप सचल ध्यान को भी अपने कार्यक्रम में शामिल कर सकते हैं. इस ध्यान को करने के लिए आपको किसी शांत माहोल का चुनाव करना है जिससे की आपका मन भटकने के chances कम हों. ऐसा नहीं है की इसको करने के लिए आपको काफी खुली जगह की ज़रूरत होगी पर इतनी जगह होनी चाहिए की आप 7 कदम आगे चल पाएँ. आप इसको करने से पहले अपने जूतों को अवश्य उतार लें. आपकी आखें आगे की और देखती हों और आपका सिर भी एकदम सीधा हो, आपके हाथ आगे की और हों और आपस में एक दुसरे हाथ की उँगलियाँ बंधी हों.

धीमी चाल के साथ अपना right leg को एक कदम आगे बढाएं. इधर-उधर के ख्याल भूल जाईये और अपना सारा ध्यान अपनी गति पर केन्द्रित कीजिए. एक कदम आगे चलने के बाद एक पल के लिए रुकें. एक बार में एक ही कदम चलें. इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए आप चलते-चलते आप अपने अंतिम छोर पर पहुँचने के बाद अपने दोनों कदमों को रोक दें. अब आपको अपने right पैर पर शरीर का भार टीकाकार मुड़ जाना है. और दुबारा विपरीत दिशा में यही क्रिया करनी है. सचल ध्यान को करते समय आपका पूरा ध्यान पैरों की गति पर होना चाहिए जैसे श्वसन ध्यान करते समय पूरा ध्यान सांसों के उतार-चढ़ाव पर होता है. अपने पैर और नीचे पृथ्वी के बीच के संयोग पर एकाग्रचित होने का प्रयास कीजिए।

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