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अच्छे माता-पिता बनने के लिए आपको इन बातों का ज़रूर रखना होगा ध्यान

माता-पिता बनना ज़िन्दगी की सबसे बड़ी ख़ुशी देता है और हमें लगता है की जैसे हमें सबकुछ मिल गया और हमारी ज़िन्दगी पूरी हो गई मगर ये आपकी ग़लतफ़हमी है क्योंकि असली ज़िन्दगी तो अब शुरू हुई है. अपने बच्चे को अच्छे संस्कार देना आपकी ज़िम्मेदारी है. अब आपके घर में एक नया सदस्य आ गया है और आपको चाहिए की अपने घर के माहोल को थोड़ा ठीक कर लें. आपका बच्चा वही observe करेगा. अगर आपकी घर का माहोल लड़ाई झगड़े वाला है तो या तो आप अभी बच्चा करने के बारे में न सोचें या फिर बच्चे की परवरिश के लिए घर change कर दीजिए. आपकी parenting ही उसका भविष्य तय करती है और उसका भविष्य ही आपका भविष्य तय करता है. क्योंकि अगर आपका बच्चा समझदार और सबके साथ respect से बात करने वाला होता है तो वो आपके बड़े होने पर आपका सबसे बड़ा सहारा बनेगा और आपकी हर छोटी बड़ी ज़रूरत का ख्याल रखेगा. अगर आपके बच्चे की परवरिश अच्छी होती है तो माता-पिता का नाम भी ऊँचा होता है. अगर आपके घर में दो बच्चे है और वो आपस में लड़ रहे हैं तो ये जिमेदारी और भी ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि अगर वो दोनों किसी बात को लेकर आपस में झगड़ा करते हैं तो आप एक को भी गलत नहीं कह सकते दुसरे को भी नहीं. अगर आप किसी भी एक को गलत ठहराते हैं तो धीरे-धीरे उसके मन में हीन भावना उत्पन्न होनी शुरू हो जाती है. आज के इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिनको अपने जीवन में अपनाने से आप एक अच्छे माता-पिता बन सकते हैं.

parenting tips in Hindi

1. बच्चों के लिए समय निकालें

दरअसल अधिकतर घर में ऐसा होता है की parent अपने busy schedule की वजह से बच्चो पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते जिसकी वजह से बच्चे पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है. ऐसा ज्यादातर उन घरों में होता है जहाँ पर husband और wife दोनों ही working होते हैं. ऐसे माता-पिता दिनभर में काम करके इतना ज्यादा थक जाते हैं की अपने बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते. छोटे बच्चे चाहते हैं की उनके parents उन पर ज्यादा ध्यान दें और ऐसा न होने पर उनके सोच नकारात्मक होती चली जाती है.

2. बच्चों को प्यार और दुलार करें

अपने बच्चे को हमेशा स्नेह और प्यार देना चाहिए क्योंकि ये ही एक ऐसी चीज़ है जो आपको कभी भी अपने बच्चे को दे सकते हैं और अपनी आपसी bounding को और बढ़ा सकते हैं. बच्चे के सिर पर प्यार भरा हाथ फेरने से आप बच्चे को ये एहसास दिला सकते हैं की आप बच्चे से कितना ज्यादा प्रेम करते हैं. अगर आप अपने बच्चे को अपना प्यार दिखाना चाहते हैं तो शारीरिक स्पर्श को बिलकुल भी अनदेखा न करें क्योंकि यही सबसे कामयाब तरीका है अपने बच्चे को अपने और करीब लाने का. आप उन्हें प्यार से गले लगाकर और फिर उनके माथे पर kiss करके भी अपना प्यार जता सकते हैं. अगर आप बच्चे के पैदा होने से अपने बच्चे के प्रति प्यार व्यक्त करते रहेंगे तो उस बच्चे का भी लगाव आपके प्रति बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा. जिससे वो कभी भी कोई भी ऐसा काम नहीं करेगा जिससे आपको बाद में मुसीबत का सामना करना पड़े या आपका सिर नीचा हो.

3. बच्चों के झगड़े समझदारी से निपटाएँ

जिनके घर में एक से ज्यादा kids होते हैं उन बच्चों में अक्सर छोटी मोटी बहस या फिर लड़ाई होना आम सी बात है. ऐसे में अगर आप किसी एक को डांटती हैं तो इस बात का उस बच्चे पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और वो समझता है की मेरे parents मुझसे कम प्यार करते हैं या फिर किसी और तरह की भावना उसके मन में पैदा हो सकती है. आप ऐसी situation में धैर्य से काम लें और दोनों को प्यार से समझाने की कोशिश करें की वो झगड़ा न करें. आपके समझाने का तरीका ऐसा होना चाहिए की दोनों समझ भी जाएँ और ऐसा भी न लगे की किसी एक को आप सुना रहे हैं. आप दोनों की target करके समझाएँ की लड़ाई करना बुरी बात है मत करो या फिर बच्चों झगडा मत करो नहीं तो मैं मारूंगी. ऐसी बातें आपको सिर्फ बच्चों को डराने के लिए करनी है, असल में मारना नहीं है.

4. बच्चों पर किसी कार्य को करने का pressure न बनाएँ

आप अपने बच्चों से ऐसा व्यवहार करें की वो एक अपने में सफल बन सकें. उसे कभी ये कक्षा में प्रथम या फिर किसी खेल में प्रथम न आने पर डांटना नहीं है. बल्कि वो जैसा भी है उसे accept कीजिए. उसे अपनी काबिलियत के अनुसार प्रयास करने का मौका दीजिए न की उसपर अच्छी performance करने का pressure डालें. ऐसा करने के बाद में आपको गंभीर परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं और कहीं ऐसा न हो की आपका बच्चा आपसे दूर होता चला जाए. या वो सोचेगा की मैं जितना भी कर लूँ मेरे parents मुझे डांटते ही रहते हैं. तो आपको उसकी कामयाबी और नाकामयाबी दोनों को अपनाना होगा.

5. अपनी भावनाओं पर control करना सिखाएँ

अगर आपके घर पर छोटे बच्चे हैं और वो घर पर शरारते करते हैं वो इतने शरारती हैं की समझाने पर भी नहीं मानते तो आप ऐसे में अपने गुस्से पर control रखें. अपनी भावनाओं को normal रहने दें, याद रखें की आज आप जो reaction देंगी वो आपके बच्चे का भविष्य बतायेगा. क्योंकि छोटे बच्चे वाही observe करते हैं जो उन्हें अपने आस पास दिखाई देता है. अगर आप गुस्से के समय अपनी भावनाओं को रोक लेती हैं तो ये जीवन भर के लिए आपके बच्चे पर एक अच्छा impact डालता है और वो भी बढ़े होने पर अपने गुस्से को control करना सिख जाता है और साथ ही अपनी और भी भावनाओं पर काबू पाने के काबिल बनता है.

6. बच्चों को हमेशा Motivate करें

अपने बच्चे को कभी भी ज्यादा डांटकर या मारकर नहीं डराना चाहिए अगर आप ऐसा करते हैं तो बच्चे के मन में हमेशा एक डर बना रहेगा और वो अपने आपको आपके सामने खुलकर पेश नहीं कर पाएगा. बच्चों को हमेशा ख़ुशी मन के साथ बड़ा होते हुए देखें. अगर वो किसी भी तरह के sports में हिस्सा लेना चाहता है या फिर किसी भी तरह से अपनी किसी बात को रखता है तो आपको उसे motivate करना चाहिए. कभी भी उसके मन की इच्छाओं को दबाने की कोशिश ना करें और उसे ऐसे न कहें की इसमें क्या रखा है? ये तो समय की बर्बादी है? ऐसे शब्दों का उपयोग करने की बजाए एक smiley face और motivate body language के साथ उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें और उसका साथ दें. जिससे की आने वाली life में भी अपने मन की बातों को आसानी से आपके सामने रख सके.

7. बच्चों की सेहत का ध्यान रखें

बच्चों की अच्छी सेहत के लिए आपको उन्हें एक स्वच्छ माहोल देना होगा जिसके लिए सबसे पहले तो आप उनके खाने-पीने का सही से ध्यान रखें. जब भी आप उनके लिए खाना बनाएँ तो बर्तनों की सफाई से लेकर सब्जीयों और फलों को भी धोकर ही इस्तेमाल में लाएं. रात में बच्चों को समय पर सुला दें फिर चाहें सुबह जल्दी से उठा दें क्योंकि रात्री की नींद बच्चे की लिए बहुत जरुरी है. उसके अच्छे स्वस्थ के लिए उन्हें खेलकूद और व्यायाम करने की शिक्षा दें. सबसे जरुरी बात जो है की उन्हें कभी भी बहार का खाना न खाने दें और जितना ज्यादा हो सके fast food से भी उन्हें दूर हो रखें.

8. बच्चों में comparison न करें

अक्सर जो ज्यादातर गलती mostly parents करते हैं वो है की वो बच्चे को labeling दे देते हैं. अब आप सोच रहे होंगे की वो कैसे? अगर आपके घर में एक से ज्यादा बच्चे हैं और उनमे से एक ज्यादा होशियार और दूसरा कम होशियार है तो आपको दोनों का comparison करने लग जाते हैं. इतना ही नहीं आप किसी न किसी बात को लेकर उसे ताना भी मारते रहते हैं की तुम्हारा भाई देखो कितना होशियार है. इससे उस बच्चे की मानसिक स्तिथि में बहुत बुरा असर पड़ता है जो पढ़ने में थोड़ा week है या फिर ऐसा भी हो सकता है की जो बच्चा पढाई में थोडा ठीक है उसकी मानसिकता भी प्रभावित हो और वो अपनी मनमानी करना शुरू कर दे की मुझे तो parents कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि मैं पढ़ने में intelligent हूँ. दोस्तों हम आपको बता दें की कभी तो इंसानों का एक जैसा दिमाग नहीं हो सकता. ऐसा बहुत ही कम होता है की की एक ही कक्षा के दो विद्याथी first आएं. आप जितना भी कोशिश कर लीजिए मगर आप किसी का comparison कभी नहीं कर पाएँगे. इसलिए इन चीजों से parents अपने आप को बचाएँ.

 

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